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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में SUPREME COURT कल करेगा सुनवाई

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मुख्य न्यायधीश एन वी रमना की तीन सदस्य बेंच कल सुनवाई करेगी। मुख्य न्यायधीश CJI एनवी रमना की अलवाह बेंच में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली शामिल है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जांच और कार्रवाई पर असंतोष जाहिर की थी।सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी किया था किहम जिम्मेदार सरकार और जिम्मेदार पुलिस देखना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि यह बर्बरता से 8 लोगो की हत्या का मामला है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले में गंभीर आरोप लगे हैं, आरोपियों के साथ एक तरह का ही व्यवहार होना चाहिए जैसा अन्य आरोपियों के साथ होता है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि आप हाथ पर हाथ रखकर मत बैठिए। चीफ जस्टीस ने पूछा था कि 302 के मामले अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई?

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि मामले की जांच कोई दूसरी एजेंसी से करा सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट सीबीआई से मामले को जांच करवाने के पक्ष में नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार के वकील ने हमें भरोसा दिया है कि वो सरकार से इस मामले की जांच किसी दूसरी एजेंसी से कराने को कहेंगे ताकि इस मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो सके है।

यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि लखीमपुर में कानून व्यवस्था बनाने के लिए एसीपी रैंक के नौ अधिकारी, डीवाई एसपी रैंक के 11 अधिकरी, 20 एसएचओ, दो कंपनी रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), 2 कंपनी सशस्त्र सीमा बल (SSB), दो कंपनी पीएसी और दो सौ कांस्टेबल की तैनाती की है। लखीमपुर की घटना की जांच के लिए रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई है।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा जिस व्यक्ति पर आरोप लग रहा है हमने उसको नोटिस जारी किया है, कल 11 बजे पेश होने को कहा गया है अगर पेश नही होते है तो सख्त कदम उठाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि पोस्टमार्टम में गोली लगने से मौत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह गाड़ी से मौत हुई है, इसमें कोई शक नहीं कि यह हत्या का मामला ( धारा 302) का केस है।

 

 

यूपी सरकार की तरफ से वकील हरीश साल्वे ने कहा कि अब तक पुलिस और सरकार की तरफ से जो हुआ है वह पर्याप्त नहीं है। मुख्य न्यायधीश ने कहा कि हमें नहीं मालूम कि इस मामले में जांच की गई है या नहीं, कृपया डीजीपी से यह सुनिश्चित करे कि साक्ष्य सुरक्षित रहे और दूसरे एजेंसी द्वारा उसे कब्जे में दिए जाने तक अंतरिम तौर पर सभी साक्ष्यों को नष्ट न किया जाए। यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वैकल्पिक एजेंसी से जांच की संभावना के बारे में भी कोर्ट को बतायेगे।

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