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क्यों बंगाल हारी भाजपा…?

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2 मई को पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के परिणाम आए, जिसमें तृणमूल कांग्रेस प्रचंड बहुमत साथ 213 सीटों जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में कामयाब रही। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी जो 200 पार का नारा दे रही थी महज 77 सीटों पर सिमट कर रह गई।

लेकिन सबसे बड़ा झटका 34 सालों तक राज्य की सत्ता में काबिज रहने वाली सीपीएम को लगा, सीपीएम अपना खाता भी नहीं खोल सकी। इसके साथ ही राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस भी पश्चिम बंगाल में खाता खोलने में नाकामयाब रही।
यह सीपीएम और कांग्रेस के लिए पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे बुरा प्रदर्शन था।

ऐसे में ये समझना काफी महत्वपूर्ण है कि भाजपा की बंगाल हारने की वजह क्या थी।

बिना किसी चेहरे के चुनाव लड़ना।

भाजपा के पश्चिम बंगाल का चुनाव हारने के कारण बहुत से हैं, लेकिन यह सबसे बड़ा कारण बुद्धिजीवियों के द्वारा बताया जा रहा है कि बंगाल में भाजपा के पास ममता बनर्जी के टक्कर का कोई भी चेहरा नहीं था।
लोकसभा चुनाव में जहां एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी जी का चेहरा हुआ करता था वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी का चेहरा हुआ करता था, दोनों की लोकप्रियता अपने आप में दोनों पार्टियों के लिए मायने रखती थी।
लेकिन विधानसभा के चुनाव में स्थानीय मुद्दा होने के कारण प्रधानमंत्री मोदी जी का चेहरा ममता बनर्जी के चेहरे के आगे फीका पड़ गया। तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए शुभेंदु अधिकारी जो नंदीग्राम के अंदर ममता को मात देने में कामयाब रहे लेकिन बंगाल की जनता का विश्वास जीत नहीं सके। इसके साथ ही भाजपा के अन्य स्थानीय नेता दिलीप घोष, मुकुल रॉय, बाबुल सुप्रियो, लॉकेट चटर्जी, इन किसी भी नेता में इतना दमखम नहीं था कि वह ममता बनर्जी के सामने खड़े हो सके। यही कारण है कि बंगाल की जनता का विश्वास भाजपा जीतने में असफल रही।

ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत टिप्पणी।

जिन मायनों में प्रधानमंत्री मोदी जी की छवि पूरे देश में एक तबके के लिए नायक के तौर पर बनी हुई है, ठीक उन्हीं मायनों में ममता बनर्जी की छवि बंगाल के अंदर एक मसीहा के तौर पर जानी जाती है।
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा लगातार ममता बनर्जी के ऊपर व्यक्तिगत टिप्पणी करना कहीं ना कहीं भाजपा के लिए काफी ज्यादा हानिकारक रहा।
जिस तरीके से खुद प्रधानमंत्री मोदी जी “दीदी ओ दीदी” कह के ममता बनर्जी को संबोधित करते थे वह कहीं ना कहीं ममता बनर्जी के पक्ष में रहा।

जय श्री राम नारे का तोड़ खेला होबे।

भारतीय जनता पार्टी लगातार जय श्रीराम के नारे का हर चुनाव में बखूबी प्रयोग करती है जिस नारे का तोड़ अमूमन किसी भी स्थानीय पार्टी के पास नहीं होता है। और इसी कारणवश भारतीय जनता पार्टी को अन्य राज्यों में काफी ज्यादा मदद मिलती है। लेकिन बंगाल में टीएमसी युवा नेता दीबांशू भट्टाचार्य के द्वारा दिया गया खेला होबे का नारा जय श्री राम के तुलना में काफी ज्यादा लोकप्रिय और प्रचलित हुआ। तृणमूल कांग्रेस के हर रैलियों में खेला होबे का गाना जोर शोर से बचता रहा। और कहीं ना कहीं बंगाल की जनता खेला होबे के धुन पर थिरकते हुए जय श्रीराम के नारे को नकार दिया।

भाजपा क्यों नहीं कर पाई बंगाल में ध्रुवीकरण।

यूं तो भारतीय जनता पार्टी की ध्रुवीकरण की राजनीति अमूमन हर राज्य में बखूबी रंग दिखाती है। लेकिन ध्रुवीकरण की राजनीति बंगाल में फेल हो क्यों हो गयी। बंगाल में अभी कुछ है तो वह केवल TMC VS BJP है कोई हिंदू मुस्लिम एजेंडा आपको देखने के लिए मिलेगा। बंगाल के बारे में या कहा जाता है कि बंगाल से ज्यादा सेकुलर राज्य पूरे भारत में और कोई नहीं है। हिंदू मुस्लिम के बीच रोटी बेटी का रिश्ता लगातार बंगाल में संप्रदायिक ताकतों को पनपने से रोकता रहता है। यही कारण रहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ध्रुवीकरण करने में नाकामयाब रही।

किसान आंदोलन की सक्रियता।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के सर जीत का सेहरा बांधने मे सबसे अहम भूमिका बंगाल की जनता की रही। लेकिन कहीं ना कहीं देश में चल रहे किसान आंदोलन की वजह से भारतीय जनता पार्टी को बंगाल के अंदर काफी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। जिस तरीके से भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत और संयुक्त किसान मोर्चा के अन्य नेता दर्शन पाल सिंह, योगेंद्र यादव जैसे लोगों की सक्रियता बंगाल में लगातार बढ़ती रही। और किसान नेताओं के द्वारा बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ प्रचार किया जा रहा था। वह चुनावी नतीजों में साफ तौर से दिखा। पश्चिम बंगाल के लाखों किसानों ने देश में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में आए और अपना मत भाजपा के खिलाफ दिया।

पश्चिम बंगाल के चुनावी परिणाम को देखने के बाद यह कहा जा सकता है कि, जिस तरीके से प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की जोड़ी को चुनाव जीतने की मशीन कहा जाता था। अब वह मशीन खराब होती हुई दिखाई पड़ रही है। भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता स्थानीय मुद्दों को भापने में नाकामयाब दिखाई पड़ रहे हैं। और इन्हीं मुद्दों के कारण पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी औंधे मुंह गिरी।

1 टिप्पणी

  1. Please see if there is a difference between the vote percentage of BJP in first six phases of bengal polls compared with the last two phases. That will reveal the impact of the corona suffering on poll results.

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