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आखिर नेहरू से इतनी घृणा क्यों… ?

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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू आज के दिन 27 मई 1964 को दुनिया को अलविदा कहा था।

भारत के धरती पर लोकतंत्र की शुरुआत के कर्णधार एवं आधुनिक भारत के निर्माता कहे जाने वाले पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत रत्न से सुशोभित किए गए थे।

आज देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि के साथ-साथ उस शक्स की पूर्ण तिथि है जिसने भारत को एक नई दिशा दिखाई थी, जिनसे भारत को लोकतांत्रिक पद्धति की ओर ले जाने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी और जिसने भारत को धर्मों और मंडलियों के जत्थो से आजाद करने और आधुनिक भारत का निर्माण करने की भूमि तैयार की थी।

लेकिन आज पूरी भारत सरकार खामोश है उस नेहरू को याद करने की सहूलियत भी नहीं उठा पा रही जिस नेहरू ने भारत के लिए अपना सर्वत्र न्योछावर किया था।

विचारधाराओं का मेल होना या विचारधाराओं का मेल ना होना दोनों बात है, लेकिन अपने पुरखों का सम्मान करना जरूरी होता है चाहे वह किसी भी विचारधारा के रहे हो।

जिन विचारों के साथ भारतीय जनता पार्टी की नींव पंडित अटल बिहारी बाजपेई ने रखी थी, शायद आज भारतीय जनता पार्टी के उन विचारों की नींव मे दीमक लग गए हैं।

और पार्टी अपने सत्ता के नशे में इस कदर चूर है कि वह अपने ही पूर्वजों के विचारों को पूरी तरीके से मिटा देने की जद्दोजहद में लगी है।

क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो शायद आज पंडित जवाहरलाल नेहरू के पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री मोदी, या फिर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, माननीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, माननीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, माननीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, इन सभी का पंडित जवाहरलाल नेहरू के श्रद्धांजलि के लिए कम से कम एक ट्वीट तो जरूर आता।

एक समय था जब पंडित जवाहरलाल नेहरू के देहांत पर उस समय के विपक्ष के सबसे बड़े नेता पंडित अटल बिहारी बाजपेई ने कुछ इन शब्दों का प्रयोग किया था…

”एक सपना अधूरा रह गया,एक गीत मौन हो गया और एक लौ बुझ गई। दुनिया को भूख और भय से मुक्त करने का सपना, गुलाब की खुशबू, गीता के ज्ञान से भरा गीत और रास्ता दिखाने वाली लौ। कुछ भी नहीं रहा, यह एक परिवार,समाज या पार्टी का नुकसान भर नहीं है। भारत माता शोक में है क्योंकि उसका सबसे प्रिय राजकुमार सो गया। मानवता शोक में है क्योंकि उसे पूजने वाला चला गया।दुनिया के मंच का मुख्य कलाकार अपना आखिरी एक्ट पूरा करके चला गया। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता”

लेकिन आज समय बदल गया है, सत्ता उन लोगों के हाथों में है जो अपने मद और गुरुर में चूर हैं,
जिन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि नेहरू कौन थे या अटल बिहारी वाजपेई कौन थे।

वैसे तो यह दिन राष्ट्रीय शोक का होना चाहिए लेकिन भारत सरकार की तरफ से औपचारिक रूप से भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के लिए श्रद्धांजलि पुष्प अर्पण करना जरूरी था।

लेकिन उन सत्ता गुरुरी लोगों को क्या कहा जा सकता है जो लगातार नेहरू को ही गाली देते हुए सत्ता में काबिज रहने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं।
हर रोज तरह-तरह के मैसेज व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के जरिए नेहरू के खिलाफ फैलाए जाते रहते हैं, जिससे नेहरू की छवि देशवासियों के अंदर केवल एक अय्याश और भ्रष्ट नेताओं में होने लगे।

और दुर्भाग्य की बात यह है कि बहुत सारे लोग इस व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के जरिए डिग्री प्राप्त करके नेहरू को गाली देना शुरू कर देते हैं।

लेकिन उनके पूर्वज पंडित अटल बिहारी बाजपेई भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक जो विचार पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिए रखते थे वह स्मरणीय है।

अटल बिहारी वाजपेई का हमेशा से यह मानना रहा है कि भारत को एक लोकतांत्रिक पद्धति में डालने एवं आधुनिक बनाने में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अहम भूमिका रही है।

एकबार का किस्सा याद आता है, जब अटल बिहारी बाजपेई पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, तो उनके समर्थकों द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय में लगी नेहरु की तस्वीर को हटा दिया गया था। जिससे अटल बिहारी वाजपेई काफी निराश हुए थे और अपने कार्यकर्ताओं को फटकार लगाते हुए तस्वीर को पुनः यथास्थिति स्थापित करने को कहाँ था।

लेकिन आज के हालात दूसरे हैं, आज की सत्तारूढ़ पार्टी
तरह तरह के मुद्दों पर जैसे कश्मीर में धारा 370 लगना, कश्मीर विवाद, भारत और चीन की लड़ाई में भारत के हाथ स्काई चीन जाना, इन सभी चीजों के लिए नेहरू को जिम्मेवार बताती है।

नेहरू की तस्वीरों को कंप्यूटर द्वारा बदल कर उन्हें अय्याश बताने की कोशिश लगातार की जा रही है।

सच तो यह है की नेहरू को गाली देने वाले लोग ना तो नेहरु के बारे में पड़े हैं नाही नेहरू के बारे में कुछ भी अभी तक सच-सच सुने हैं।
केवल व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के जरिए प्रोपेगेंडा का शिकार होकर नेहरू को गाली देने निकल जाते हैं।

तो सवाल यह है कि सत्ता के मद में चूर भारतीय जनता पार्टी क्या अपने देश के पूर्वजों की रक्षा अपने देश के पूर्वजों का सम्मान नहीं कर सकती.? और अगर वह ऐसा करने में असमर्थ है, तो उसे सत्ता में रहने का अधिकार किसने प्रदान किया है।

आज जिस आधुनिकरण का प्रयोग नेहरू को बदनाम करने में किया जा रहा है, उस आधुनिकरण की नींव नेहरु के द्वारा ही रखी गई थी।
लोग आज भी नेहरू को कितना भी बदनाम करने की कोशिश कर लें, लेकिन एक बहुत बड़ा तबका नेहरू को आधुनिक भारत का नायक मानता है, जो यह कहता है भारत की असली खोज करने वाले नेहरू थे और लोगों के हित के बारे में सोचने वाले नेहरू थे।

आज उनकी पुण्यतिथि है उनके पुण्यतिथि के अवसर पर हम पंडित जवाहरलाल नेहरू को शत शत नमन करते हैं।

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