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Supreme court का आदेश दिल्ली एनसीआर में नहीं होंगे कोई भी निर्माण कार्य।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में खराब वायु गुणवत्ता के मद्देनजर निर्माण प्रतिबंध फिर से लागू कर दिया। हालांकि निर्माण से संबंधित गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियां जैसे प्लंबिंग, आंतरिक सजावट, बिजली का काम और बढ़ईगीरी आदि जारी रह सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने यह भी श्रमिकों का ख्याल रखते हुए कहा कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत राज्यों को निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए श्रम उपकर के रूप में एकत्र किया गया धन उन्हें उस अवधि में आजीविका चलाने हेतु दिया जाए जिस दौरान निर्माण गतिविधियां बाधित रही। भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और सूर्य कांत की खंडपीठ ने आदेश दिया था।

हवा की गुणवत्ता में सुधार को देखते हुए 22 नवंबर को एनसीआर में निर्माण गतिविधियों पर लगा प्रतिबंध हटा लिया गया था लेकिन बुधवार की देर रात शीर्ष अदालत का आदेश जारी हुआ जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण प्रतिबंध को फिर से लागू कर दिया।

शीर्ष अदालत के तीन जजों वाली इस पीठ ने कहा “दिल्ली के लिए एक सांख्यिकीय मॉडल होना चाहिए। यह राष्ट्रीय राजधानी है। कल्पना कीजिए कि हम दुनिया को किस तरह के संकेत भेज रहे हैं।

मौसम कैसा रहने वाला है, इसका अनुमान लगाने के लिए आपके पास एक प्रणाली होनी चाहिए। इसके लिए तदर्थ उपाय पर्याप्त नहीं होंगे।”

 

केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा प्रदुषण पर दिए गए एक दलील के लिहाजा पीठ ने मेहता से कहा “तो, हम हवा के कारण बच गए हैं, प्रदुषण के ऊपर हम भगवान पर निर्भर हैं। लेकिन हम केवल हवा की दिशा या मौसम विभाग या भगवान भरोसे नहीं बैठे रह सकते। हमें बताएं कि आपने कौन से बड़े कदम उठाए हैं।” इसपर तुषार मेहता ने जवाब दिया कि उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में प्रदूषण का स्तर नीचे चला जाएगा और तीन दिनों के बाद सम्बंधित आयोग द्वारा स्थिति की समीक्षा भी की जाएगी।

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